कपालभाति प्राणायाम – Kapalbhati Pranayama

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कपालभाति प्राणायाम – यह एक संस्कृत का शब्द है। कपाल का अर्थ होता है माथा यानी सिर और भाति का अर्थ होता है प्रकाश। यह प्राणायाम सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। कपालभाती प्राणायाम करने से चेहरे में चमक आ जाती है और शरीर निरोगी हो जाता है। इस प्राणायाम के अनेक फायदे है। कपालभाति प्राणायाम पेट से जुड़ी बिमारियों जैसे पेट दर्द, एसिडिटी, कब्ज और खट्टी डकार इत्यादि को दूर करता है।

यह प्राणायाम वजन कम करने में भी सहायक होता है। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह प्राणायाम दिमाग के लिए भी अच्छा होता है। साथ ही साथ गले से सम्बन्धित रोग भी ठीक हो जाते है।

कपालभाति प्राणायाम

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कपालभाति प्राणायाम से जुड़ी कुछ खास बातें

  • यह प्राणायाम को सुबह के वक़्त करना ज्यादा फायदेमंद होता है।
  • शौच के बाद कपालभाति प्राणायाम को करें।
  • इस प्राणायाम को खाली पेट करें।
  • कपालभाती प्राणायाम को करने के बाद लगभग ½ घंटे तक कुछ नहीं खाए।
  • जिन लोगो ने ऑपरेशन कराया है, वो विशेषज्ञों के सलाह लेकर इस प्राणायाम को करें।
  • कमर दर्द, मिर्गी, स्लिप डिस्क, हर्निया और स्टेंट इत्यादि के रोगी यह प्राणायाम ना करें।
  • गर्भवती महिला इस आसन को ना करें।
  • कपालभाती, हाइपरटेंशन के मरीज को विशेषज्ञों के नेतृत्व में करना चाहिए।

Benefits of Kapalbhati Pranayama – कपालभाति प्राणायाम के फायदे

  • नाड़ियों की शुद्धिकरण चाहते है, तो कपालभाती प्राणायाम करें।
  • यह आसन मन को शांत करने का काम करता है।
  • पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।
  • रक्त संचार सही रहता है।
  • यह आसन वजन कम करने में मददगार होता है।
  • तंत्रिका तंत्र और दिमाग को उर्जान्वित करता है।

Kapalbhati Pranayama Kaise Kare – कपालभाति प्राणायाम कैसे करें

कपालभाति प्राणायाम – सबसे पहले ऐसी जगह का चयन करें, जो शांत, स्वच्छ और खुला वातावरण का हो। अब कपड़ा या चटाई बिछाकर समान्य आसन में बैठ जाये। जब समान्य आसन में बैठे तो रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। अब अपने दोनों हाथ को आराम से घुटनों पर रखें। उसके बाद पेट को ढीला छोड़ दें। आब नाक से सांस को बाहर छोड़े और पेट को अंदर की ओर खींचे। इस प्रकार अपने पेट को अंदर की ओर खीचें की वह रीढ़ की हड्डी को छू लें।

इस प्राणायाम को 3 बार करें। प्रत्येक राउंड में में कम से कम 20 साँसे छोड़े। हरेक राउंड के बाद थोड़ा आँखे बंद करके विश्राम करें। कपालभाती प्राणायाम अपनी क्षमता के अनुशार करें।

नोट : इस क्रिया के दौरान श्वास अंदर लेने की आवश्यकता नहीं है। क्यूंकि इसमें श्वास अपने आप फेफड़ों के अंदर पहुँच जाती है।

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