Benefits of Anulom Vilom Pranayama in Hindi

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Anulom Vilom Pranayama – आज हम अनुलोम विलोम प्राणायाम के बारें में जानेंगे। अनुलोम का अर्थ सीधा होता है और विलोम का अर्थ विपरीत होता है। सीधा और उल्टा कहने से मतलब, नाक का दायाँ और बायाँ छिद्र से है। यह एक महत्वपूर्ण प्राणायाम है। इस प्राणायाम के जरिये नाक के छिद्रों द्वारा सांस को खिंचा और छोड़ा जाता है। “Anulom Vilom Pranayama को “नाड़ीशोधक प्राणायाम” भी कहा जाता है।

प्राणायाम की व्याख्या पातञ्जल में कुछ इस प्रकार की गयी है : – “तस्मिन्नसंति श्वासप्रश्वासयोर्गतीविच्छेदः प्राणायामः”

इसका मतलब है की श्वास और प्रश्वास की गती को ही विच्छेद प्राणायामः कहा जाता है।

Benefits of Anulom Vilom Pranayama in Hindi

Anulom Vilom

अनुलोम विलोम प्राणायाम को करने के कई फायदे है। तो चलिए जानते है Anulom Vilom Benefits के बारे में।

  • यह प्राणायाम रक्तचाप को सही रखने में मददगार होता है।
  • यह प्राणायाम नाड़ियों को शुद्ध करने का काम करता है।
  • इस Pranayam से लगभग 72000 नाड़ियों की शुद्धी हो जाती है।
  • अनुलोम विलोम प्राणायाम शरीर से वात, कफ और पित्त इत्यादि के विकार को दूर करने का काम करता है।
  • अगर इस प्राणायाम को आप रोजाना करते है। तो इससे आपका कोलेस्ट्रोल लेवल कम हो जायेगा।
  • Anulom Vilom Pranayama फेफड़े को मजबूत बनाता है।
  • आपको जानकर आश्चर्य होगा की, यह प्राणायामः हृदय को भी शक्ति प्रदान करता है।
  • इस प्राणायाम के जरीय रक्त के दूषित तत्व बाहर निकल जाते है।
  • दमा के मरीज के लिए यह Pranayam फायदेमंद होता है।
  • Anulom Vilom को रोजाना करते है, तो सर्दी और जुकाम की शिकायत न के बराबर मिलेगी।
  • यह प्राणायामः तनाव से राहत दिलाता है।
  • अनुलोम विलोम रोजाना करने से चेहरे में चमक आ जाती है।
  • यह प्राणायाम मन को एकाग्र बनाता है।
  • अनुलोम विलोम प्राणायाम, जोड़ों के दर्द, गठिया और सुजन की समस्या में आराम दिलाता है।

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Anulom Vilom Pranayama kaise kare – अनुलोम विलोम प्राणायाम की विस्तृत जानकारी

सबसे पहले शांत, साफ़-सुथरी और खुली जगह का चयन करे लें। फिर कपड़ा या चटाई बिछाकर समान्य आसन में बैठ जाये। आप चाहे तो अपनी सुविधानुसार सुखासन, पद्मासन, स्वस्तिकासन या सिद्धासन इत्यादि अवस्था में बैठ सकते है। उसके बाद नाक के दाहिने छिद्र को दाहिने अंगूठे से बंद करें। फिर बाएं नाक के छिद्र से श्वास अंदर की ओर भर लीजिये।

Anulom Vilom – उसके बाद अब दाहिने तर्जनी ऊँगली से नाक के बाएं छिद्र को बंद कर लीजिये। अब अंगूठे को दाहिने नाक से हटा दीजिये। और उसी दाहिने नाक के छिद्र से सांस को बाहर छोड़िये। फिर दायें नाक से सांस अंदर की ओर भर लीजिये। फिर अंगूठे की मदद से दाहिने नाक के छिद्र को बंद कर लीजिये। उसके बाद बायीं नाक से सांस बाहर की ओर छोड़िये।

शुरुआती समय में अनुलोम विलोम को 1 से 3 मिनट तक ही करें। उसके बाद धीरे धीरे इस प्राणायाम के अभ्यास को बढ़ाये। इस अभ्यास को 10 मिनट से कम ही रखें।

नोट : लगातार 10 मिनट से ज्यादा समय तक अनुलोम विलोम प्राणायामः का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

Anulom Vilom Pranayama karte waqt Savdhani

  • इस प्राणायामः को खाली पेट ही करें।
  • आहार ग्रहण करने के 3 घंटे बाद भी कर सकते है।
  • एनीमिया से पीड़ित मरीज इसे करने में थोड़ी सावधानी बरते।
  • जल्दी-जल्दी सांस भरने और निकालने की गलती ना करें।
  • Anulom Vilom प्राणायाम करते वक़्त सांस लेने अथवा छोड़ने की आवाज़ नहीं सुनाई पड़नी चाहिए।
  • कमजोर व्यक्ति को भी यह आसन करने में परेशानी हो सकती है। इसीलिए विशेषज्ञों की निगरानी में ही इस प्राणायामः को करें।

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